कोई भक्त परमात्मा के प्रति पूर्णरूप से समर्पित हो जाता है
तो फिर उसके पास कोई तर्क नहीं रहता। इसके बाद उसके मन में किसी प्रकार की भावना नहीं आती। इससे यह भी सिद्ध होता है कि संसार का प्रत्येक कण परमात्मा के इशारे पर चलता है। यह अलग बात है कि परमात्मा को कभी हम वृक्ष के रूप में देखते हैं तो कभी पहाड़ के रूप में। कभी मनुष्य के रूप में देखते हैं तो कभी पशु-पक्षी के रूप में। इस प्रकार हमारे देखने की विधि हर जगह अलग-अलग होती है, लेकिन उस परमात्म-तत्व में कोई अंतर नहीं आता है।
रसायन शास्त्र के अनुसार पूरा ब्रह्मांड एक है। हिमालय के पहाड़ हों या घास का कोई मैदान, इन सबमें कोई अंतर नहीं होता। हम अध्यात्म की प्रयोगशाला में इन तमाम वस्तुओं को रखते हैं तो स्पष्ट हो जाता है कि विज्ञान यहां नहीं पहुंच रहा है। इस संसार का एक-एक कण, उसी परमात्म शक्ति से संचालित हो रहा है।वैज्ञानिकों का मानना है कि यह ब्रrांड अद्भुत है। इसमें करोड़ों आकाश गंगाएं हैं। हमारे सौरमंडल से भी बड़े ग्रह हैं। ब्लैक होल्स हैं, जिनमें बड़े से बड़े ग्रह समा जाते हैं। खगोल शास्त्रियों का कहना है कि इस असीमित ब्रrांड में एक ऐसी अदृश्य शक्ति है, जो इसका संचालन कर रही है। महानतम वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन भी इस तथ्य को मानते थे कि ऐसा लगता है कि कोई अदृश्य शक्ति इस अद्भुत ब्रrांड को संचालित कर रही है। मनुष्य कहता है कि मेरे पास पांच ज्ञान इंद्रियां, पांच कर्म इंद्रियां और एक मन है। कुल मिलाकर ग्यारह हुए। जिनके पास ये सारे के सारे हो जाएं, वह अपने चारों ओर एक लकीर खींचकर खड़ा हो जाता है कि हम मनुष्य हैं। पशु-पक्षियों की तुलना में हम बड़े ही सभ्य, विचारवान व गहरी समझ वाले हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि पशु-पक्षियों के पास भी इंद्रियां होती हैं। विज्ञान भी मानता है कि मनुष्य, वनस्पतियों और कुदरत पर ब्रrांड के ग्रहों का प्रभाव पड़ता है। यदि हम सूर्य से प्रभावित होते हैं तो सूर्य भी हमसे अवश्य प्रभावित होता रहता है। यह बहुत गहरा विज्ञान है। दरअसल विज्ञान और अध्यात्म का एक ही अंतिम लक्ष्य है। वह है सत्य का खुलासा करना। फर्क सिर्फ यही है कि विज्ञान जहां भौतिक पदार्र्थो का अध्ययन करता है वहींअध्यात्म चेतना का विज्ञान है। आप अदृश्य शक्ति को परमात्मा कहें, गॉड कहें या कोई भी नाम दें, लेकिन वही शक्ति कुदरत को और हम सभी को संचालित कर रही है।
तो फिर उसके पास कोई तर्क नहीं रहता। इसके बाद उसके मन में किसी प्रकार की भावना नहीं आती। इससे यह भी सिद्ध होता है कि संसार का प्रत्येक कण परमात्मा के इशारे पर चलता है। यह अलग बात है कि परमात्मा को कभी हम वृक्ष के रूप में देखते हैं तो कभी पहाड़ के रूप में। कभी मनुष्य के रूप में देखते हैं तो कभी पशु-पक्षी के रूप में। इस प्रकार हमारे देखने की विधि हर जगह अलग-अलग होती है, लेकिन उस परमात्म-तत्व में कोई अंतर नहीं आता है।
रसायन शास्त्र के अनुसार पूरा ब्रह्मांड एक है। हिमालय के पहाड़ हों या घास का कोई मैदान, इन सबमें कोई अंतर नहीं होता। हम अध्यात्म की प्रयोगशाला में इन तमाम वस्तुओं को रखते हैं तो स्पष्ट हो जाता है कि विज्ञान यहां नहीं पहुंच रहा है। इस संसार का एक-एक कण, उसी परमात्म शक्ति से संचालित हो रहा है।वैज्ञानिकों का मानना है कि यह ब्रrांड अद्भुत है। इसमें करोड़ों आकाश गंगाएं हैं। हमारे सौरमंडल से भी बड़े ग्रह हैं। ब्लैक होल्स हैं, जिनमें बड़े से बड़े ग्रह समा जाते हैं। खगोल शास्त्रियों का कहना है कि इस असीमित ब्रrांड में एक ऐसी अदृश्य शक्ति है, जो इसका संचालन कर रही है। महानतम वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन भी इस तथ्य को मानते थे कि ऐसा लगता है कि कोई अदृश्य शक्ति इस अद्भुत ब्रrांड को संचालित कर रही है। मनुष्य कहता है कि मेरे पास पांच ज्ञान इंद्रियां, पांच कर्म इंद्रियां और एक मन है। कुल मिलाकर ग्यारह हुए। जिनके पास ये सारे के सारे हो जाएं, वह अपने चारों ओर एक लकीर खींचकर खड़ा हो जाता है कि हम मनुष्य हैं। पशु-पक्षियों की तुलना में हम बड़े ही सभ्य, विचारवान व गहरी समझ वाले हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि पशु-पक्षियों के पास भी इंद्रियां होती हैं। विज्ञान भी मानता है कि मनुष्य, वनस्पतियों और कुदरत पर ब्रrांड के ग्रहों का प्रभाव पड़ता है। यदि हम सूर्य से प्रभावित होते हैं तो सूर्य भी हमसे अवश्य प्रभावित होता रहता है। यह बहुत गहरा विज्ञान है। दरअसल विज्ञान और अध्यात्म का एक ही अंतिम लक्ष्य है। वह है सत्य का खुलासा करना। फर्क सिर्फ यही है कि विज्ञान जहां भौतिक पदार्र्थो का अध्ययन करता है वहींअध्यात्म चेतना का विज्ञान है। आप अदृश्य शक्ति को परमात्मा कहें, गॉड कहें या कोई भी नाम दें, लेकिन वही शक्ति कुदरत को और हम सभी को संचालित कर रही है।








