गुरुवार, 1 सितंबर 2016

सतगुरुदेव जी की जय

कृपया सभी आदरणीय भाई बहनो से विनती है आप इस पोस्ट को थोडा समय निकाल कर अवश्य पढ़िये !!!


              ।।सतगुरुदेव जी की जय→↓
                      सत साहेब

भगतो दास ये जो पोस्ट लिख रहा इसे पढ़ने से आपको इस बात पर और दृढ़ विश्वास होगा कि संत रामपाल जी महाराज स्वयं भगवान है ना कि सिर्फ 1 संत और ये पोस्ट दास गुरु जी के ज्ञान के अनुसार लिख रहा है।
अब दास अपनी पोस्ट पर आता है जी, संत रामपाल जी महाराज सत्संग में बताते है कि जब सतगुरु रूप में परमात्मा इस धरती पर आते है। तो उन्हें कोई पहचान नही पाता यहां तक की 21 ब्रह्माण्ड के मालिक काल भगवान भी उन्हें 1 आम संत ही समझते है। हम जीवो की तो ओकात ही क्या है कि परमात्मा को पहचान जाएं "गरीबदास कर्ता की बाजी भेद ना कोए पावे" अर्थात जब परमात्मा अपना खेल खेलता है अपनी बाजी चलता है तो किसी को भी नही पता चलने देता अपने बारे में परन्तु अपने कृपापात्रों के लिए इशारा भी कर देते है "खेलत गुफ़्तार सेन भंजन सब फोकट फेन" परमात्मा गुप्त रूप से अपने सब खेल खेलता है और साथ में सेन भी कर देता है अर्थात इशारा भी कर देता है कि मै परमात्मा हूँ अब दास आप भगतो को वो इशारे बताना चाहते है जिस से मुझे बहुत बार ये अनुभव हुआ की ये संत रामपाल जी परमात्मा है। गौर करने वाली बात है गुरु जी जब भी सत्संग करते है और जब वो ये दोहा बोलते है:-

गरीब, हम ही अलख अल्लाह है क़ुतुब गोश और पीर।
गरीबदास खालिक धणी हमरा नाम कबीर।।

तो परमात्मा संत रामपाल जी महाराज सेन अर्थात इशारा करते है अपने हाथ से अपनी और की मैं परमात्मा हूँ जिनपे परमात्मा दया करके समझा दे, समझा दे, वरना ये किसी के समझ में नही आती। देखो अब परमात्मा ने अपना खेल भी खेल दिया मतलब सत्संग भी सुना दिया और सेन भी करदी कि मैं परमात्मा हूँ।
परमात्मा सत्संग में कहते है

गरीब तुम साहेब तुम सन्त हो तुम सतगुरु तुम हंस।
गरीबदास तेरे रूप बिना और न दूजा अंश।।

मतलब गुरु जी कहते है कि हे कबीर साहेब आप ही सन्त हो सतगुरु हो अर्थात कबीर साहेब आप ही सतगुरु है। गुरु जी अपने मुख से बताते है कि वो परमात्मा स्वयं आते है इस धरती पर सतगुरु रूप् में। मतलब इस समय सतगुरु रूप में जो इस धरती पर वो परमात्मा है। 1 समय में धरती पे सिर्फ 1 ही सतगुरु होता है वो है संत रामपाल जी अर्थात संत रामपाल जी परमात्मा है क्योंकि सतगुरु रूप में स्वयं परमात्मा आते है इस धरती पर।
इस दास ने 1 दिन 1 भगत भाई की आत्मकथा पढ़ी उसमे उस भगत ने बताया की मुझे परमात्मा सतलोक ले गए वहां मुझे संत रामपाल जी दिखे सतलोक में, तो मैंने उनको दंडवत प्रणाम् किया तो वो बोले आप हमे क्यों दंडवत कर रहे हो हम आपके गुरु जी नही है आपके गुरु जी तो कबीर साहेब है उन्होंने मुझे तो कब का सतलोक भेज दिया मतलब इस समय धरती पर संत रामपाल जी नही खुद कबीर साहेब है और जब आरती पूरी होती है तो परमात्मा स्वयं कहते है कि

"तेरा रामपाल अज्ञान किया सतलोक का वासी"

अब आप समझ ही गए होंगे की सन्त रामपाल जी कौन है और कबीर साहेब कौन है और हमारे गुरु जी कौन है। और सतगुरु रूप में इस धरती पर इस समय कौन है और भी बहुत से प्रमाण आपको मिल जाएंगे सत्संग सुनने से कि संत रामपाल जी परमात्मा है। तो दास की सभी भगतो से प्रार्थना है कि सभी भगत ज्यादा से ज्यादा सत्संग सुने क्योंकि गुरु जी सत्संग में कहते है सत्संग से ज्ञान होता है और ज्ञान से डर बनता है और डर से भक्ति बनती है
(कबीर साधु जब लग डरके रहे
जबलग पिंड और स्वास् ।।)
भक्ति मार्ग में सफल होने के लिए सत्संग सुनना बहुत जरुरी है ।

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